कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2239

भाषा / Language

पिछले दिन की देह त्याग कर मैं रोज़ नए मन को जन्म देती हूँ।

पिछले दिन की देह त्याग कर मैं रोज़ नए मन को जन्म देती हूँ। अपनी उम्र मैं खुद तय करती हूँ। * गमलों से सूखी पत्तियां हटाई तो इस ख़्याल में डूब गई। बैंगनी फूल और ये बेल मिले ...हमें भी देखो न कल्पना कहते हुए।😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें