ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2223

भाषा / Language

इसे तुम्हारी लीला ही कहूँगी प्रेम

✦
इसे तुम्हारी लीला ही कहूँगी प्रेम.... जो तुम मुझ तक होकर भी नहीं हो.... ईश्वर भी तो बस लिख सकती हूँ ....देखा नहीं है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें