कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2221

भाषा / Language

प्रेम सबसे बेकसूर शै है जो एक ही ऐब में गिरफ़्तार रहता है।

*प्रेम सबसे बेकसूर शै है जो एक ही ऐब में गिरफ़्तार रहता है। *अपनी हैरत के सारे हक़ मैंने उसे सौंप रखे हैं.... अजब अजीब अजूबा सब अक्षर हैं मेरे लिए। *लकीरें दीवार बनने में देर नहीं लगाती ..... उससे पहले ही प्रेम रोप दो.... आँखें हरियल रहेंगी। *प्रेम हमेशा से ही उघड़ी हुई पंखुड़ियों वाला फूल है । बस उसके आस पास की पत्तियां हरी पीली भूरी होती रहती हैं। *सब तो उसे प्यार करते हैं ... तुम क्या करती हो कल्पना? मैं रुकी रहती हूँ *कविता रोज़ी नहीं देती ... पर रोज़ देती है.... सुकून तुम्हें लिखना आदत है....लिख कर भूल जाती हूँ खुद को।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें