भाषा / Language
प्रेम सबसे बेकसूर शै है जो एक ही ऐब में गिरफ़्तार रहता है।
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*प्रेम सबसे बेकसूर शै है जो एक ही ऐब में गिरफ़्तार रहता है।
*अपनी हैरत के सारे हक़ मैंने उसे सौंप रखे हैं....
अजब
अजीब
अजूबा
सब अक्षर हैं मेरे लिए।
*लकीरें दीवार बनने में देर नहीं लगाती .....
उससे पहले ही प्रेम रोप दो....
आँखें हरियल रहेंगी।
*प्रेम हमेशा से ही उघड़ी हुई पंखुड़ियों वाला फूल है ।
बस उसके आस पास की पत्तियां हरी पीली भूरी होती रहती हैं।
*सब तो उसे प्यार करते हैं ...
तुम क्या करती हो कल्पना?
मैं रुकी रहती हूँ
*कविता रोज़ी नहीं देती ...
पर रोज़ देती है....
सुकून
तुम्हें लिखना आदत है....लिख कर भूल जाती हूँ खुद को।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें