कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2218

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खुली आँखों का एक सपना ये भी देखा था कि कोई मुझे पढ़े। मेरे ल…

खुली आँखों का एक सपना ये भी देखा था कि कोई मुझे पढ़े। मेरे लिखे को कभी आवाज़ मिले । जो भी शिद्दत से चाहा मिल जाता है ....मुझे। छोटी छोटी खुशियाँ हैं जो ये शब्द दे जाते हैं।लिखती रहती हूँ ...उड़ाती रहती हूँ। शुक्रिया प्रणव ... पहला प्रयास पसंद आये सभी को ...😊😊 लिंक कल साँझा करूँगी। आज इस खूबसूरत चाहना को साँझा कर रही । स्नेह बरसता रहे.....😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें