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रचना 2211

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दक्षु मेरे पीछे पड़ा था कि बिना दावत के कैसा बर्थडे

दक्षु मेरे पीछे पड़ा था कि बिना दावत के कैसा बर्थडे? माँ तुमने श्राद्ध और मेरे एग्जाम के चक्कर में सस्ते में निपटा दिया। एक खाना ही तो आप अच्छा बनाती हो ।सबको बुलाओ पार्टी में। तो आज बाकायदा आस पास के सब रिश्तेदारों को निमंत्रण भेजा गया था। चाची से कहकर केक बनवाया गया था । bday मास्क बनाये गए थे...हर परिवार के सदस्य के लिए । पालक पनीर , खीर,मिक्स्ड veg, रायता,पूरी का मेन्यू था । अपने भाइयों के लिए चाउमीन, ड्राई कॉर्न और गोभी मंचूरियन ,नारियल के लड्डू 😊😊😊 राघव और दक्षु की ज़िद्द ... 😊😊 सितम्बर खत्म होने को आया ... माँ का बर्थडे खत्म न होरा । बच्चों का मन रखने के अलावा क्या किया जा सकता है । जितने पल खुश हो लो इनके साथ । आज का दिन दक्षु के नाम वैसे आज भव्या का दिन है ।उसको बस दुआएँ भेज दी । 😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें