कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2202

भाषा / Language

प्रेम इस लिए भी कम हो रहा कि प्रेमी घट रहे ... कभी प्रेम कह…

प्रेम इस लिए भी कम हो रहा कि प्रेमी घट रहे ... कभी प्रेम कहा नहीं जा रहा कभी सुना नहीं जा रहा। तो प्रेमी रहें सब ज्यादा 💞💞💞💞
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें