भाषा / Language
पूरा दिन बिता कर रात तक तुम तक पहुंच ही जाती हूँ।
✦
*पूरा दिन बिता कर रात तक तुम तक पहुंच ही जाती हूँ।
तुम मेरी पृथ्वी का आख़री और शुरुआती कोना हो।
*तुम मुस्कुराते हो तो कई चेहरों पर फूल खिलते हैं....
मेरे चेहरे पर सुबह उग आती है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें