कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2185

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अजूबा😊😊😊

अजूबा😊😊😊 दक्षु... माँ अजूबा देखोगी? माँ.... हाँ दिखाओ दक्षु.... ये देखो सेब माँ... इसमें अजूबा क्या है? दक्षु....सेब के साथ बची हुई ये पत्ती माँ... कह तो सही रहे हो पर इसे समझाओ कैसे अजूबा? दक्षु.... जाने कब इस पत्ती के साथ टूटा होगा ।फिर पैकिंग ,लोडिंग,मार्केटिंग के बाद मेरे घर पहुंचा । पत्ती फिर भी सलामत रही और सबसे महत्वपूर्ण बात घर में मेरे हाथ लगा और मेरे मन में ये ख़्याल आया। है ना अजूबा। माँ.... चुपचाप खा ले रे बाबा ...सेब तेरे पेट में गया और पत्ती अब भी बच गयी.... ये है अजूबा।☺️☺️☺️☺️☺️
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें