कल्पनाशब्दों के बीच
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फेसबुक ने Unfollow और Unfriend की इतनी सुंदर और आसान सुविध…

फेसबुक ने Unfollow और Unfriend की इतनी सुंदर और आसान सुविधा उपलब्ध करा तो रखी है पर जाने क्यों लोग judge करने का बटन दबाते रहते हैं। क्यों माने तुम्हारी बात? इधर अपनी ही खिचड़ी न पकरी तुम पुलाव खाओ या भात ... हमको क्या? नापसंद है चेहरा या बात या तरीका तो चुप्पे से खिसक लो...क्या जरूरी है दूसरों को बता कर नाराज़ करना? इततु सी जगह तो मिलती है मनमानी की ... करने दो पेट दर्द की दवा लो .. सरदर्द है तो बाम लो पर भाईसाहब जज न करो । मगन रहो ... क्या घुनने बनते हो। 😊😊😊एक साल बाद मेमोरीज़ में बूढ़े दिखोगे जलकुकडे नहीं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें