कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2173

भाषा / Language

हम सब कागज़ रंग रहे....... ज़िन्दगी खुरच कर ।

हम सब कागज़ रंग रहे....... ज़िन्दगी खुरच कर । आज स्कूल गयी तो निर्मला दीदी से मिली। हम दोनों का जन्मदिन एक दिन के अंतर पर आता है।हमेशा की तरह वो मुझे याद करना इस बार भी नहीं भूली। श्राद्ध के कारण उसका उपहार due है। उसकी निश्चल मुस्कान मुझे बहुत प्रिय है। पिछले 6 सालों से मेरे कमरे और स्कूल को चमका कर रखा है दीदी ने।स्कूल में मेरी हर चीज़ का पता उसे रहता है। मैं भूल भी जाऊं तो वो खोज कर ला देती है। चीजों को रखने का शऊर है उसे। स्कूल बंद है पर आज भी मेरा कमरा एक दम साफ सुधरा मिला । सारे टेबल, कंप्यूटर यहां तक कि मेरी कुर्सी भी उसने चादर से ढँक कर रखी है कि धूल न जमने पाए। कमरा खोलते ही पूछा पानी पियोगी मैडम ..? मैंने कहा... हाँ ।झट से अपने बैग से ठंडे पानी की बोतल थमा दी।कौन प्यार कर सकता है मुझे इतना ? निर्मला के पति सरकारी नौकरी करते हैं ।उसे कोई कमी नहीं पर वो इस लिए काम करती है कि खाली घर बैठ कर क्या करना... स्कूल और बच्चों की सेवा से उसका GOD खुश रहेगा उससे। क्रिसमस और ज़िन्दगी सुकून से बीतेगी। उसकी ऐसी बातों ने ही मुझे उसका फैन बना रखा है। ये उसका मेरे प्रति अपार प्रेम ही तो है कि वो मुझे miss करती है। हम क्या बाँट सकते हैं आपस में .... वो मेरी सुन लेती है मैं उसकी सुन लेती हूँ। कभी सुख कभी दुख भी। मन जिसके सामने खुल जाए उस पल वही ईश्वर होता है। आज एक दूसरे को हैप्पी बर्थडे बोल कर जो मुस्कान हम दोनों के चेहरे पर आई वो साँझा कर रही। साड़ी वाली तस्वीर कुछ दिन पहले की है जब वो बोली आज आप सुंदर लग रहे एक तस्वीर मुझे भी चाहिए।😊😊 निर्मला जैसे लोग दुनिया में और होने चाहिए। 💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें