भाषा / Language
"आता हूँ
✦
"आता हूँ "......
कह के ...
तुम चल तो दिए .....पिया
दो नैन...इक अर्ज़ ने
पीछा भी किया
रोक सकूँ .....तुम्हारा रास्ता
बदल सकूँ .....तुम्हारी सोच
"थोडा" भी .....ज्यादा" है मेरे लिए
"पूरा" भी ....."आधा" है मेरे लिए
पर तुम .....
तुम तो "मैं " की ......भूख मिटाने चले थे
आँखों में चमकीले .....सपने उगाने चले थे
हाँ ....चली भी तो थी
कुछ मील ......तुम्हारे साथ
पर ....लौटा दी गयी
झूठी कहानियाँ गढ़ के ....
सारी जिम्मेवारियां मल के .....
रोज़ ......बाट जोहती हूँ
अपनी ....कोफ़्त पोंछती हूँ
अरज़ बस ....बंद होठों से
बेबसी यूँ .....खुले नैनों से
रोज़ बहाती हूँ ....
रोज़ ......तुम्हें बुलाती हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें