कल्पनाशब्दों के बीच
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आगये

आगये ... बाहर पायदान पर किस्से - कहानियां पोंछ दो ये लो पानी ....सारी नज़्में - गज़लें धो डालो वहाँ दरवाज़े पर रखे तौलिये से सारे नग़्मे - गीत सुखा डालो खुद पर से ये सारी लप्रेक सारी क्षणिकाएं झाड़ लो देख लो ... कुछ भी बाक़ी न रहे न एक पंक्ति न एक शब्द न एक अक्षर अब आँख बंद कर के छू सकते हो मुझे..... मैं कल्पना हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें