कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2120

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अंदाजन नहीं .....तज़ुर्बे से कह रही हूँ

अंदाजन नहीं .....तज़ुर्बे से कह रही हूँ ज़िन्दगी तिकोनी है .... इक मैं .....बाहें फैलाये और दो सिरे हर ख्वाइश के
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें