भाषा / Language
तुम मेरे लिए भूख से हो
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तुम मेरे लिए भूख से हो....
भोजन का तो फिर भी हिस्सा होता है पर भूख का नहीं...
जानते हो..
भूख बहुत स्वार्थी शब्द है....
और मनमौजी भी
या तो है या ...नहीं है
कभी थोड़ा है ...कभी हद से पार भी
कभी कम कम में पूरा
कभी पूरे में आधा-अधूरा
ये मेरा हिस्सा खत्म भी नहीं होता
भूख न रहे तो सब हिस्से धरे रह जाते हैं।
स्वाद ,रंग ,रंगत ,खुश्बू से परे भूख बस लग जाती है।
एक निवाला बहुत हो तुम मेरे लिए।
बाँट नहीं सकती ये शब्द ....
ये सिर्फ़ मेरा है।
हाँ बंट सकती हूँ ...भोजन की तरह
*खुद से बातें करते रहना ... बातें करते रहना ।
सुबह की रसोई 😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें