भाषा / Language
सुंदर दुःख
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सुंदर दुःख
*कैसे हो ?
.......
प्रश्न पर प्रश्न कभी नहीं चढ़ा।
*संवाद आमद बढ़ा देता है।
पुल तोड़ देना चाहिए ।
*ये लो कस्तूरी
ढूंढो मुझे ।
*चाहो तो नाव पर नाम लिख लो ......
हक़ समुंदर का ही रहेगा
*आज सच बोल रहा...
झूठ बहुत बार कहा है।
*वक़्त पर वक़्त का ही फफोला उगेगा ...
रुको तब तक।
*कहानियों में धुआँ उठता रहता है ....
न जज करो न इग्नोर
*प्रेम लिखने वाली चीज़ है... लिखो
मर्तबान ख़ाली रखो
*पेड़ पत्तों से ही कहता रहा अपना दुःख
फूल बहार नहीं.. बहरे थे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें