कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2108

भाषा / Language

सुंदर दुःख

सुंदर दुःख *कैसे हो ? ....... प्रश्न पर प्रश्न कभी नहीं चढ़ा। *संवाद आमद बढ़ा देता है। पुल तोड़ देना चाहिए । *ये लो कस्तूरी ढूंढो मुझे । *चाहो तो नाव पर नाम लिख लो ...... हक़ समुंदर का ही रहेगा *आज सच बोल रहा... झूठ बहुत बार कहा है। *वक़्त पर वक़्त का ही फफोला उगेगा ... रुको तब तक। *कहानियों में धुआँ उठता रहता है .... न जज करो न इग्नोर *प्रेम लिखने वाली चीज़ है... लिखो मर्तबान ख़ाली रखो *पेड़ पत्तों से ही कहता रहा अपना दुःख फूल बहार नहीं.. बहरे थे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें