कल्पनाशब्दों के बीच
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यहां ढ़ेर सारी उदासी है ...गुम कर सकती हो कल्पना

यहां ढ़ेर सारी उदासी है ...गुम कर सकती हो कल्पना ? मगर एक शर्त है ... "उदासी " को बस दो ही बार छू सकती हो तुम ....आईने ने पूछा । अपनी "उदासी" किसी पर पोत कर नहीं उसकी "उदासी" पोंछ कर गुम होती है। नुस्ख़ा tried and tested है। मैं यहीं हूँ...आजमा लो। मैंने उसे कागज़ पर लिख कर दे दिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें