कल्पनाशब्दों के बीच
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रेखाओं और शब्दों से बन जाती हूँ मैं

रेखाओं और शब्दों से बन जाती हूँ मैं.... प्रेम का हस्ताक्षर बस तुम्हारा रहे। निःशब्द हूँ ... अपनी कॉलेज की सहेली Raminder Kaur के भेजे इस नज़राने के लिए दिल से शुक्रिया। तुम्हारे पास ये मेरी अमानत है।जल्द ले लूँगी। मुझे हूबहू बना देने के लिए शुक्रिया। 💐💐💐💐love u यार😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें