भाषा / Language
अदृश्य मेरा वो
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अदृश्य मेरा वो ....
*है कोई वो मुझमें अदृश्य ...जिसका कसा हुआ पाश मुझे जाने नहीं देता ।
*है कोई वो मुझमें अदृश्य... जो थाम कर मुझे स्वप्नलोक में धकेल आया और कर दिया मुझे बेघर हमेशा के लिए ।
*है कोई वो मुझमें अदृश्य जिसका चेहरा इस वक़्त नींद से बस कुछ पल पहले वाला क्षण सा अनछुआ है।
*है कोई वो मुझमें अदृश्य जो हर मिठास मुझमें घोल देगा ...एक बाज़ीगर जिसका मेरी रूह पर कब्ज़ा है।
*कोई सुंदरता मुझे फांस नहीं सकती जैसी कि उसकी अनुपस्थिति । उसका न होना भी सुंदर है .... मेरे चेहरे पर दमकता है।
तुम हो।
अदृश्य पर ....मुझमें हो
मेरे हर दृश्य में भी...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें