कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2051

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अभी सुबह सुबह का तोहफ़ा

अभी सुबह सुबह का तोहफ़ा... सुनो मनोरमा! मुझे पूरा यकीन है कि अगले कुछ दिन मैं इस किताब के साथ प्रेम में डूबी रहूँगी। मान के चल रही हूँ कि हर पंक्ति में कुछ सीखने लायक मिलेगा। आपको पढ़ना हमेशा सुकून रहा है... अजित सिंह तोमर जी बहुत सारी शुभकामनाएं💐💐💐 आप जैसा तो नहीं लिख सकती पर अपना मन किताब पर जरूर लिखूँगी।😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें