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रचना 2040

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जिस रोज़ तेरी अखियाँ

जिस रोज़ तेरी अखियाँ मैंने पहली बार तकियाँ वो दिन और उसकी घड़ियाँ रखियां.....संभाल रखियां 😊😊😊 सुनो ना...... मस्त है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें