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रचना 2034

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इंतज़ार खुद को किसी के लिए रोके रखना ही नहीं होता

इंतज़ार खुद को किसी के लिए रोके रखना ही नहीं होता ... उसको थाम कर अपनी तरफ रखे रहना भी होता है। *तस्वीर में हरापन और हथेली दोनों इंतज़ार है मेरा। 😊😊शुभरात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें