उधारी के शब्दों से लिख ही नहीं सकते प्रेम... अपनी शक्कर खुद घोलनी पड़ती है। शुभरात
रचना 203115 जुलाई 2020भाषा / Languageहिन्दीEnglishउधारी के शब्दों से लिख ही नहीं सकते प्रेम✦उधारी के शब्दों से लिख ही नहीं सकते प्रेम... अपनी शक्कर खुद घोलनी पड़ती है। शुभरातकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें