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रचना 2029

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मिलते ही उसने कहा ...तुम्हारी हँसी

मिलते ही उसने कहा ...तुम्हारी हँसी मैंने कहा ....तुम्हारी आँखें नमी पसंद रूहें ... फिर कुछ नहीं बोली *तस्वीर मेरी favourite है 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें