कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2018

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हँसती हुई स्त्री दुनिया में बेहद कम आँखों को बख्शी गयी हैं

हँसती हुई स्त्री दुनिया में बेहद कम आँखों को बख्शी गयी हैं ... उन ज्यादा आँखों को शिफ़ा पहुंचे। कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें