कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1989

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आसमान नीले से स्लेटी यूँ ही नहीं हुआ

आसमान नीले से स्लेटी यूँ ही नहीं हुआ..... मेरा मन घुलता गया है उसमें.... चुपके चुपके
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें