कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1954

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मौसम पढ़ा करती थी कभी

मौसम पढ़ा करती थी कभी.... आज गढ़ लेती हूँ तुम्हारे नाम का ... सच है..... बस सीखने की ही तो बात है। *आज अल्मोड़ा मेरे घर में खिले सुंदर फूल आप सब के लिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें