कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1940

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मेरे पास अब बस चुटकी सा दिन बचा है ।

मेरे पास अब बस चुटकी सा दिन बचा है । अपनी रात में मिला लो । स्त्री का शायद आखरी संवाद यही होता होगा। खुद से।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें