कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1935

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लाओ अपने आंसुओं से बात करने दो

लाओ अपने आंसुओं से बात करने दो ... मैं तुम्हारे मौन को हँसाना चाहता हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें