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रचना 1911

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तारों को महफ़ूज़ रखने के लिए दिन थोड़े ही नोचते हैं

तारों को महफ़ूज़ रखने के लिए दिन थोड़े ही नोचते हैं.... बस इस रात को कुछ देर और बुझा देते हैं। बेहद सलीक़े से चुप - चाप शुक्रिया तुम्हारा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें