कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1904

भाषा / Language

किसी और के

किसी और के कहने भर से अपने ख्वाबों के अधखिलेे फूल तोड़ देना..... इससे बेहतर है मैं उन्हें खुद पर लादे रखना पसंद करूंगी .... पूरा खिलने तक खुद पर सूख जाने तक
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें