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रचना 1899

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आज अमृता जी को पढ़ा

आज अमृता जी को पढ़ा .... जाना कि जो सहज है वही सबसे कठिन चाहे वो साहिर जी के हिस्से का खामोश प्रेम रहा हो या इमरोज़ के हिस्से का बेबाक इश्क़ अमृता जी हम सबमें नज़र आती हैं आज भी ..... किसी में साहिर सी किसी में इमरोज़ सी बेहद सहज सी सबसे कठिन भी क्योंकि वो प्रेम को define नहीं करती सिर्फ रखती है सिर्फ करती हैं अपनी शर्तों पर जिससे चाहे जब चाहे इसी कारण कठिन हो जाती है सहज होते होते हम भी तो "अमृता" से ही नज़र आते हैं सहज से ......पर कितने कठिन
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें