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रचना 1893

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प्रतीक्षा ,एकांत ,उदासी... प्रेम से मिला प्रसाद है और हताशा…

प्रतीक्षा ,एकांत ,उदासी... प्रेम से मिला प्रसाद है और हताशा उससे मिला श्राप बहुत देर से दोनों एक दूसरे को तक रहे थे .... शायद यही कह रहे होंगे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें