कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1876

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समंदर से नदी

समंदर से नदी ... नदी से बून्द बन जाने का समय है। ईश्वर नई संवेदनाएं रच रहा चुपके चुपके।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें