भाषा / Language
लफ़्ज़ों से तस्वीर उभार लेते हैं
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लफ़्ज़ों से तस्वीर उभार लेते हैं ,
तस्वीर को लफ्ज़ उधार देते हैं ,
ये दीवानगी है शायद हममें ...
कोरी पाती भी निखार लेते हैं।
नीले के हर shade से प्यार है...
है ना ?....तुम्हें भी।
शाम छत पर तुम मिले ...ढ़ेर सारा
☺️☺️☺️☺️
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें