कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1844

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कुछ शब्द बाँध देने से

कुछ शब्द बाँध देने से गर रूह आज़ाद हो जाये तो ..... सौदा महँगा कहाँ है ? बोलो ना ..... कहीं मैं रोज़ ठगी तो नहीं जाती ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें