कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1821

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इन रेश्मी सलवटों में अधखुले मोगरे होंगे

इन रेश्मी सलवटों में अधखुले मोगरे होंगे उनकी भीनी महक में ढूँढ लेना मुझे इंतज़ार रहेगा..... इस बार शब्दों से भरूँगी...... तुम्हारे लिए इक मौसम बिना रंग वाला बसंत कल्पना का...... बसंत
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें