कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1796

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मैं लिखती हूँ

मैं लिखती हूँ ... क्योंकि मुझे इसी तरह ओझल होना आता है। प्रेम ......तुम तो कुछ अलग कर लिया करो कभी। 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें