भाषा / Language
बनना तो मैं
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बनना तो मैं ....
जुगनू .....
पाखी ......
और .....वो तितली भी थी
पर उस देहलीज़ को छूते ही ....
"स्त्री "बना दी गयी
वही रंगत ...
वही रौशनी ....
वही मन .....
वही उड़ान .....
सब कुछ आज भी.....
तुम्हारा ही है ........मेरे पास
पर ......"मोहर "लगा हुआ
सुनो .....
तुम्हारे परों पर भी.....
है कोई निशान "स्त्री वाला " ?
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें