कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1790

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तुम्हारे मिलने पर ही साल पूरा होता है

तुम्हारे मिलने पर ही साल पूरा होता है ...... थोड़ा अलग है .... पर हम दोनों तो हमेशा से ही अलग थे ....हैं... और रहेंगे। एक दिल कितना सोख पायेगा तुमको ? इस लिए दो आंखें ला रहीं हूँ.... साल भर के हर पल में तुम्हें रोकने के लिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें