कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1785

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नज़ारे

नज़ारे ..... पेड़ ,पहाड़ ,हिमालय ,आसमान सब मिले आज राह में । अल्मोड़ा में दिल्ली से कम ठंड और ज्यादा खिली धूप है। सगड़ के साथ दगड़ का मज़ा ले रहे अभी। शुभ रात...😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें