कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1770

भाषा / Language

दरारों में भरने के लिए शब्दों से बेहतर फूल नहीं होते। इससे…

दरारों में भरने के लिए शब्दों से बेहतर फूल नहीं होते। इससे पहले कि उदासियाँ पीपल बन जाएं ... दरारें दरकने लगें.... सुनो ... कहो.... जी भर कर बस ये कहने सुनने वाले फूल बीज सदाबहार रहें।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें