ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1765

भाषा / Language

कुछ इस कदर वाकिफ़ है वो मेरे जज़्बातों से

✦
कुछ इस कदर वाकिफ़ है वो मेरे जज़्बातों से बस "माँ" .....कहता है ठग लेता है ......अपनी बातों से क्योंकि बचपन लौट कर नहीं आ सकता .... ईश्वर उसे लौटा देता है आँचल में।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें