भाषा / Language
कुछ इस कदर वाकिफ़ है वो मेरे जज़्बातों से
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कुछ इस कदर वाकिफ़ है वो मेरे जज़्बातों से
बस "माँ" .....कहता है
ठग लेता है ......अपनी बातों से
क्योंकि बचपन लौट कर नहीं आ सकता .... ईश्वर उसे लौटा देता है आँचल में।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें