कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1756

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तुम इतना सारा हो मेरे पास कि जाने और आने जैसे शब्द भी अपने…

तुम इतना सारा हो मेरे पास कि जाने और आने जैसे शब्द भी अपने मायने खो चुके। अक्सर आना ..मिलना नहीं होता और जाना तो कभी मिलना था ही नहीं। कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें