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रचना 1754

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देहलीज़ का दीपक ....लाना पिया

देहलीज़ का दीपक ....लाना पिया मैं बाती ,तुम तेल .....बन जाना पिया मैं तुझ में .......कुछ ऐसा भीगूँ तुम बस मुझ में ........समाना पिया दोनों जलकर .......ख़ाक बने "मैं "और "तुम" ......मिटाना पिया सुख दुःख में .....हम साथ जलें ऐसी लौ .......इब लगाना पिया रंगोली सुकून की ......मैं भर दूं तुम बस संग ........मुस्काना पिया तम जीवन के ........संग हरें ऐसी राह ........दिखाना पिया इक ऐसा दीपक .......लाना पिया मेरी देहलीज़ ........सजाना पिया © कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें