कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1748

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उदासी में ना रंगत है ना ज़ायका

उदासी में ना रंगत है ना ज़ायका ... फिर भी सब को डुबाये रखती है। कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें