कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1742

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आज...... क्या दूँ तुम्हें

आज...... क्या दूँ तुम्हें ? लो..... मेरे शब्दों की आड़ ले लो कभी "रीते" नहीं रहोगे l
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें