कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1727

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बंद पलकों में ....मखमली एहसास जगा दूं

बंद पलकों में ....मखमली एहसास जगा दूं यादों का दरख़्त ........इश्क़ के पत्ते उगा दूं कल्पना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें