कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1723

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अस्तित्व शुक्रिया। 💐💐💐

अस्तित्व शुक्रिया। 💐💐💐 मखमली आवाज में खुद का लिखा आज पहली बार सुना । बेहद खूबसूरत उपहार । शायद ऐसा कि जैसे किसी ने मुझे ना दिया हो। खूब सारी दुआएँ। प्रेम अपार । शब्द बंधन बँधा रहे। तुम जैसे दोस्त इस आभासी दुनिया में बने रहने का एक मात्र कारण है। अस्तित्व हमेशा कायम रहे। एक बार फिर दिल से शुक्रिया। तुम्हारी आवाज़ ... अहा💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें