भाषा / Language
सच है
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सच है ....
हर बार
हर रोज़
अपने लिखे हुए की
आख़री पंक्ति में
तुम्हें ही धर के
सो जाती हूँ
कि अगली सुबह
तुम ही मिलो
मुस्कुराते हुए
पहली पंक्ति में
लिखे जाने के लिए
मेरी सोच में जिए जाने के लिए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें