भाषा / Language
तुम स्थिर हो जाओ और शून्य भी
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तुम स्थिर हो जाओ और शून्य भी.....
उसे कहने दो जिसने
द्वार पर खिड़कियां
ताले पर उड़ान
सूरज पर जुगनू
और
इस नीले आसमान पर मछली लिखने का बीड़ा उठाया है
मौत की पीठ पर..
ज़िन्दगी हर कोई नहीं लिख सकता
करने दो उसे एकालाप
तुम बस ध्वनियाँ बटोरो
कोई आवाज़ बन तो रहा अकेला तुम्हारे लिए
उस एक को साँस लेने दो
तुम बस देखो ...सुनो ..
और खप जाओ
कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें